Monday, 7 November 2011

Kashmakash

एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए

कोयला नहीं जुदा हीरे से
थोडा वक़्त ज़रूरी है उसे भी चमकाने के लिए

तुम जिस कशमकश में हो उलझे
वोह गैर ज़रूरी बात है
ये अँधेरा भी हो जायेगा फीका
ये छोटी सी काली रात है
गर अगर ये रात ना होती
थक कर फिर तुम कैसे सोती
सोना भी ज़रूरी है थोड़ी ताजगी के लिए

एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए

हर ख़ामोशी ने सिखाया हालातों को झेलना
हर आंसू ने सिखाया मुस्काराहट बिखेरना
हर दुश्मन ने सिखाया दोस्ती को संभालना
हर बार नफरत ने सिखाया मोहबात बटोरना
तुम क्यों इस किनारे पर हो डूबे
दो बूँद पानी के लिए

एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए

वैभव मैत्रेय

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