एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए
कोयला नहीं जुदा हीरे से
थोडा वक़्त ज़रूरी है उसे भी चमकाने के लिए
तुम जिस कशमकश में हो उलझे
वोह गैर ज़रूरी बात है
ये अँधेरा भी हो जायेगा फीका
ये छोटी सी काली रात है
गर अगर ये रात ना होती
थक कर फिर तुम कैसे सोती
सोना भी ज़रूरी है थोड़ी ताजगी के लिए
एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए
हर ख़ामोशी ने सिखाया हालातों को झेलना
हर आंसू ने सिखाया मुस्काराहट बिखेरना
हर दुश्मन ने सिखाया दोस्ती को संभालना
हर बार नफरत ने सिखाया मोहबात बटोरना
तुम क्यों इस किनारे पर हो डूबे
दो बूँद पानी के लिए
एक कशमकश ज़रूरी है
थोडा मय को छल्काने के लिए
वैभव मैत्रेय
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