Thursday, 10 October 2013

खामोशी

खामोशी मेरी तुम सुन ना पाओगे
जब तक हमे ना अपने पास बुलाओगे
लबों पे मेरे मुस्कराहट तो होगी
मगर दिल के दर्द को कहाँ देखपाओगे
तरसति रहेंगी ये रातें भी तब तक
हमें अनजुमन में ना जब तक बुलाओगे
चिरागों की रोशनी तो परवाने के लिये थी
भला किस रोशनी से ये चिराग जलाओगे
"वैभव मैत्रेय"

Monday, 7 October 2013

तेरे ख्याल

एक पल भी तेरे ख्याल से गाफिल नहीं था मैं
बेशक तेरा चर्चा सरेआम ना हुआ
मजमां मेरी मसरूफियत का कारण बन गया
सलामत रहे तू फिर यही थी बस दुआ
"वैभव मैत्रेय"

तेरी रहमत

कृपा ईश्वर की मुझपर दिन रात रहती है
बड़ा खुशनसीब हूँ मैं ऐसा दुनियाँ कहती है
तेरी रहमत को मैं हरबार मेहसूस करता हूँ
करके हरबार तेरे दर्शन, मेरी अश्रुधारा बहती है
होते ही परेशान, बुलाना तेरा करीब
नज़रें इनायत ऐसी तेरी हरबार होती है
कृपा ईश्वर की मुझपर दिन रात रहती है
बड़ा खुशनसीब हूँ मैं ऐसा दुनियाँ कहती है
"वैभव मैत्रेय"