Thursday, 28 February 2013

हाँ हमको मोहोब्बत है तुमसे

नहीं सोये वो
नजाने कितनी रातों से
उलझे रहे
नजाने किन फ़िज़ूल बातों में

नहीं जानते थे वो
इस इंतज़ार का सबब
था ये सवाल एहेम
कि तुम मिलोगे कब

बदलना करवट तनहा
सर्द रातों में
नहीं सोये वो
नजाने कितनी रातों से

ऐसा नहीं की
मोहोब्बत हम नहीं करते
कसूर इतना कि
हम इज़हार नहीं करते

क्या बताएं कि
दिल के करीब आप कितना हैं
नहीं जानते फिर भी
क्यों अँधेरा इतना है

चलो मैं आज तुमको
एक दुनियाँ नयी दिखलाता हूँ
थाम लो हाथ ज़रा
तुम्हे तुमसे भी मिलवाता हूँ
आज ये भी जानलो सनम
ये जो गीत मैं गुनगुनाता हूँ
बेपनाह मोहोब्बत है तुमसे
खुदसे ज्यादा तुमको चाहता हूँ

आज नहीं दे सकता
जाने तुम्हे अपने हाथों से
चाहता हूँ बहलाना दिल
तेरा अपनी बातों से
न उलझोगे अब तुम
फ़िज़ूल बातों में

"वैभव मैत्रेय"