एक आंसू गिर पड़ा
चुप चाप कल आँख से
कैसे छिपाऊ बताओ इसे
हुज़ूर मैं आप से
क्या बताऊ की ये आया
कहाँ से मेरे खुदा
क्या जानु क्यों बहा
क्यों परेशां है दिल होकर जुदा
कर रहा था क्या ये भी
इंतज़ार मेरे तनहा होने का
शायद अफ़सोस था इसे भी
मेरे खामोश होने का
बह निकला अचानक
फट पड़े जज़्बात थे
एक आंसू गिर पड़ा
चुप चाप कल आँख से
कैसे छिपाऊ बताओ इसे
हुज़ूर मैं आप से
"वैभव मैत्रेय"
चुप चाप कल आँख से
कैसे छिपाऊ बताओ इसे
हुज़ूर मैं आप से
क्या बताऊ की ये आया
कहाँ से मेरे खुदा
क्या जानु क्यों बहा
क्यों परेशां है दिल होकर जुदा
कर रहा था क्या ये भी
इंतज़ार मेरे तनहा होने का
शायद अफ़सोस था इसे भी
मेरे खामोश होने का
बह निकला अचानक
फट पड़े जज़्बात थे
एक आंसू गिर पड़ा
चुप चाप कल आँख से
कैसे छिपाऊ बताओ इसे
हुज़ूर मैं आप से
"वैभव मैत्रेय"