Creativity has no limits
Tuesday, 8 November 2011
Asha
नदी के दो झिलमिलाते किनारे
चाहते है एक दुसरे को अलिंगंबध करना
मगर जानते है ये नहीं है मुमकिन
मिलन होगा मगर सागर में पहुँचकर
जहाँ किनारे अपना अस्तित्व खो देंगे
वैभव मैत्रेय
(मेरी ज़िन्दगी की पहली कविता)
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