Thursday, 19 July 2012

तेरी रहमत का एहसास

तेरी रहमत का एहसास अक्सर होता है मुझे
तेरे करम से ही ये सब हासिल है मुझे

करता है तू हमेशा और होता है नाम मेरा
हर प्रेरणा है तू ही, सिर्फ चेहरा है एक मेरा

बिन पंख उड़ रहा मै, आकाश में ए खुदाया
नहीं डर मुझे किसी का, है जबतक है तेरा साया

करवाने वाला तू है, औकात क्या है मेरी
चले गए सभी जब, नज़रें न तुमने फेरी

माटी का मै खिलौना, गुलफाम हो गया हूँ
गुमनाम था अभी तक, पहचान हो गया हूँ

पाया है जो भी मैंने, दिया है तुम्ही ने मुझको
बढ़ा भी जो एक कदम मै, आये नज़र तुम मुझको

सिखाया तुने चलना, अंधेरों में भी मुझको
रोशन किये चिराग भी जब डर लगा था मुझको

है शुक्रिया हमेशा, ए परवर-दिगारे आलम
रखना यूँही इनायत, मेरा तुही है इक शिवाला

"वैभव मैत्रेय"



Wednesday, 18 July 2012

For you my friend

You are a true warrior
Know how to fight for your survivor

You are a pure mind
Be the same, wise and kind

You have a beautiful soul
People loves you so you love them all

You have a poet inside you
Let it be alive, let it be always you

You are a traveler, travelled places
See the beauty; see how nature embraces

You are so dear
Close your eyes and can find me near

Tuesday, 17 July 2012

रंजिशों से भी रिश्ते कायम होते हैं

रंजिशों से भी रिश्ते कायम होते हैं
नाराजगी के भी कुछ ऐसे आयाम होतें हैं

कि जब शब्दों का वजूद दरमियान नहीं होता
खामोशियों से इश्क के फरमान होतें है

लगाकर इलज़ाम हम पे, उसपर  उल्फत का
वो सरेबाज़ार खुद नीलाम होते हैं

ये गफलत में करीब अपने, हमें बुला लेना
और नापाक हम हैं, उसपर ये इलज़ाम होतें हैं

मांगते हो जो दिल मेरा, ये बिकाऊ चीज नहीं जानिब
खुदा का पाक घर है ये, जहाँ भगवान् रहतें हैं

वैभव मैत्रेय




जंग

 न कोई रिश्ता है दरमियाँ हमारे
वो कौन होगा जो मेरी तकदीर सवारें
ये क्यों अचानक रुकी नज़रें तुमपर
ये कौन सी है जंग जो बिन लड़े, हारे

"वैभव मैत्रेय"

सवाल

इस चिलमन से झांकती आँखों में तेरी
देखे हैं कितने आज सवाल मैंने
कुछ का जवाब है मेरे पास,
ओर कुछ मुझे भी है ज़िन्दगी से लेने

"वैभव मैत्रेय"