बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं
हर बात कैसे शब्दों में कही जाए हर बार
ख़ामोशी से ही सही हम ये इज़हार करते हैं
बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं
ना चाहा कभी तेरी चाहत भी मिल जाए बदले में
तुम भी चाहते हो हमें, ये हम एतबार करते हैं
जब नहीं होती तुम पास मेरे, मै कितना तनहा होता हूँ
जब नहीं करती तुम बात मुझसे, मै कितना उदास होता हूँ
रात काटी हैं आँखों ही आँखों में यूँ तो कई बार मैंने
तुम भी जागी हो कितनी रातें, हम एहतराम करते हैं
बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं
दूर हो कर भी कभी, कहीं कोई दूरी नहीं दिखती
जब से ख़रीदा है मुझे तुने, मेरी शख्सियत नहीं दिखती
टुकड़े टुकड़ों में शायद मै आज बिक भी जाऊं मेरे मौला
ये सच है लेकिन किसी बाज़ार में ये मोहोबत नहीं बिकती
तुम्हे चाहा हैं मैंने जिस दीवानगी से ए हमदम
नहीं होगी कभी ये कम, आज ये एलान करते हैं
मेरी मोहोबत नहीं मोहताज़ किसी भी दिन या मौके की
खुश्बू रहेगी यूँही जिंदा, ना ज़रूरत किसी हवा के झोंके की
ये रिश्ता नहीं ऐसा की हम समझाएं दुनिया को
ये ना जाने दौर है कैसा, क्यों अपने ठुकराया करते हैं
बंद आँखों से हम अक्सर तेरा दीदार करते हैं
ये सच है मेरे हमदम की हम तुम से प्यार करते हैं
वैभव मैत्रेय