सदियों के बाद
जो आये वो याद
तो आँसू छलक गए
धड़का ये दिल
सुनके तेरी आवाज़
तो आँसू छलक गए
रहो तुम आबाद
हुए हम बर्बाद
तो आँसू छलक गए
करने तेरा दीदार
लगी दीवानों की कतार
किया हमें जब शुमार
तो आँसू छलक गए
भूले सारे अपने गम
हुई नज़रें करम
तो आँसू छलक गए
न जाना इतनी दूर
ऐ मेरे हुज़ूर
कि होजाये हम मजबूर
और फिर आँसू छलक पड़ें
कहो मेरी कसम
मिलें हर एक जन्म
काश कहें फिर हम
कि आंसू किधर गए
"वैभव मैत्रेय"