Monday, 14 November 2011

Talash

ना जानते हुए भी हमेशा महसूस करता हूँ अपने चारो तरफ एक खुसबू
ये तो नहीं जानता की ये किसी के बदन की महक है या फिर प्रकृति ने अंगड़ाई ली है

कितनी ही बार महसूस किया की मेरा मन एक बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ता, दौड़ता ही जा रहा है
कितनी बार काबू में करना चाहता हूँ मन की इच्छाओं को,
मगर सब व्यर्थ नजर आता है

फिर एक नया ख्याल पैदा हुआ
क्या ये परिस्थितियां सब के जीवन में आती होंगी

ये तो मात्र एक, सिर्फ एक प्रश्न है
ना जाने ऐसे कितने ही प्रश्न रोज़ मेरे सागर रुपी मन की लहरों में उछलते बैठते रहते हैं !

पर सब या ज्यादातर का अंत या कहिये परिणाम शुन्य ही निकलता है

मुझे किसी ऐसे साथी की तलाश है जो मुझे दिशाहीन होने से बचा सके,
जो मुझे सहारा देकर हर कठ्नाई से लड़ने का !
कब समाप्त होगी ये तलाश ?