Thursday, 29 March 2012

शायद कल ही की तो बात थी

शायद कल ही की तो बात थी
जब आप हमारे साथ थी
न दिन अभी ढला था ओर न हुई अभी रात थी

दिन की उस तपिश के बाद, छोड़ कर सारे विषाद
बारिश की रिमझिम बूंदों के बीच, मेरा हाथ थामे सावन के बीच
न कहीं कोई शोर था, न कहीं कोई आवाज़ थी
न दिन अभी ढला था ओर न हुई अभी रात थी

एक हवा का झोका यूँ झुल्फों को तेरी छु गया
बैठा तेरी आगोश में ओर न जाने कब खो गया
वक़्त था जैसे थम गया, थमी थी मेरी सांस भी
न दिन अभी ढला था ओर न हुई अभी रात थी

क्यों अचानक बीत गया, वो लम्हा हमारे प्यार का
क्यों अकेला रह गया, वो जिस्म बेज़ार सा
देखते ही देखते मंज़र सारा बदल गया
आँखें खुली तो दिल ये पागल मचल गया
तुम न थे करीब मेरे, तेरी खुसबू लेकिन साथ थी
न दिन अभी ढला था ओर न हुई अभी रात थी


Monday, 26 March 2012

तेरी खुसबू

तेरी चाहत में जो कटी रातें वो मै लाता कैसे
मेरे ख्वाबों को तेरी आँखों में बसाता कैसे
मेरी सांसो से तेरी खुसबू मै मिटाता कैसे

तुने दुनियां की निगाहों से जो बचकर देखा
प्यार ही प्यार निगाहों में भरकर देखा
कभी दूर तो कभी पास आकर देखा


मेरी नज़रें तुझे ढूंढे हैं दीवानों की तरह
दर्द बहता है मेरी आँखों से क्यों पानी की तरह
न पूरी हुई जो कभी उस कहानी की तरह
तेरी चाहत में जो कटी रातें वो मै लता कैसे
मेरे ख्वाबों को तेरी आँखों में बसाता कैसे
मेरी सांसो से तेरी खुसबू मै मिटाता कैसे

तेरी यादें में साथ अपने ले आया हूँ
हर शिकायत को आज छोड़ आया हूँ