एक आह थी जो रूह से
दिल में उतर गयी
हमें फनाह करके
वो नज़रें किधर गयी
दिन रात खोजता रहा
मैं आप का पता
पाया तुम्हें सिर्फ ख्वाब में
जहाँ भी नज़र गयी
करना ये एहसान
उनके मिलने पे ए खुदा
चली जाए मेरी जान भी
जिस ओर वो गयी
"वैभव मैत्रेय"
दिल में उतर गयी
हमें फनाह करके
वो नज़रें किधर गयी
दिन रात खोजता रहा
मैं आप का पता
पाया तुम्हें सिर्फ ख्वाब में
जहाँ भी नज़र गयी
करना ये एहसान
उनके मिलने पे ए खुदा
चली जाए मेरी जान भी
जिस ओर वो गयी
"वैभव मैत्रेय"