एक कन्या कुवारी थी
वो तो लाखो पे भारी थी
हर दिल को अजीज़ थी
हर घर की दुलारी थी
उसकी चाल मतवाली थी
मेरे मित्र की वो साली थी
एक कन्या कुवारी थी
मिलवाया मुझे जिसने
वोह उसकी मामी थी
बाते हुई उससे
पर देती वो गाली थी
एक कन्या कुवारी थी
चेहरा ख़ूबसूरत था
और कानो में बाली थी
पहनी हुई उसने
वो ज़री वाली साडी थी
आखों में था कजरा
और होटों पे लाली थी
एक कन्या कुवारी थी
हर लड़के ने देख उसे
अपनी सासें थामी थी
एक बिजली गिरी जैसे
जब एक कन्या उसे..............मम्मी पुकारी थी
अब वो ना कन्या कुवारी थी
फिर भी मेरी आँखों में खुमारी थी
हुआ कुछ जादू था
और छाई बेकरारी थी
हडबडाकर जागा मै
और रह गयी अधूरी वो कहानी थी
वैभव मैत्रेय
वो तो लाखो पे भारी थी
हर दिल को अजीज़ थी
हर घर की दुलारी थी
उसकी चाल मतवाली थी
मेरे मित्र की वो साली थी
एक कन्या कुवारी थी
मिलवाया मुझे जिसने
वोह उसकी मामी थी
बाते हुई उससे
पर देती वो गाली थी
एक कन्या कुवारी थी
चेहरा ख़ूबसूरत था
और कानो में बाली थी
पहनी हुई उसने
वो ज़री वाली साडी थी
आखों में था कजरा
और होटों पे लाली थी
एक कन्या कुवारी थी
हर लड़के ने देख उसे
अपनी सासें थामी थी
एक बिजली गिरी जैसे
जब एक कन्या उसे..............मम्मी पुकारी थी
अब वो ना कन्या कुवारी थी
फिर भी मेरी आँखों में खुमारी थी
हुआ कुछ जादू था
और छाई बेकरारी थी
हडबडाकर जागा मै
और रह गयी अधूरी वो कहानी थी
वैभव मैत्रेय