देश में चारो तरफ मच रही है हाहाकार
देश के रक्षक ही कर रहे हैं देश में नरसंघार
प्यार और मोहोबत एक ही माँ के दो बच्चे हो गए हैं जुदा
हर इंसान का आज अलग है खुदा
बूढी माये बच्चो के बावजूद भी कहला रही हैं बाँझ
देश के पतन की होगई है साँझ
नौजवानों को देकर अलग वतन का वास्ता
नरसंघरियों ने दिखाया खून खराबे का रास्ता
जो कभी था सच्चा इंसान
आज वोह भी खड़ा है बेचने को ईमान
वैभव मैत्रेय
देश के रक्षक ही कर रहे हैं देश में नरसंघार
प्यार और मोहोबत एक ही माँ के दो बच्चे हो गए हैं जुदा
हर इंसान का आज अलग है खुदा
बूढी माये बच्चो के बावजूद भी कहला रही हैं बाँझ
देश के पतन की होगई है साँझ
नौजवानों को देकर अलग वतन का वास्ता
नरसंघरियों ने दिखाया खून खराबे का रास्ता
जो कभी था सच्चा इंसान
आज वोह भी खड़ा है बेचने को ईमान
वैभव मैत्रेय
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