Friday, 11 November 2011

Haalaat

देश में चारो तरफ मच रही है हाहाकार
देश के रक्षक ही कर रहे हैं देश में नरसंघार

प्यार और मोहोबत एक ही माँ के दो बच्चे हो गए हैं जुदा
हर इंसान का आज अलग है खुदा

बूढी माये बच्चो के बावजूद भी कहला रही हैं बाँझ
देश के पतन की होगई है साँझ

नौजवानों को देकर अलग वतन का वास्ता
नरसंघरियों ने दिखाया खून खराबे का रास्ता

जो कभी था सच्चा इंसान
आज वोह भी खड़ा है बेचने को ईमान

वैभव मैत्रेय

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