घर क्या है ये समझना मुस्किल है
शायद आँगन खुशियों से परिपूर्ण
मगर सदस्यों का भी तो महत्व है
एक स्त्री एक पुरुष और एक दो छोटे छोटे बच्चे
शायद ये एक आदर्श घर है
मगर ये मात्र मेरी कल्पना है क्योंकि
घर कैसे है ये कहना मुश्किल है
प्यार, ममता, वात्सल्य, करुणा
ये घर के आंगन में खिले कुछ रंग बिरंगे फूलों की तरह हैं
जिनका आनंद घर का हर सदस्य भोगता है
मगर नफरत, स्वार्थ, एकाकी होना
इन फूलों में काँटों के सामान है शायद क्योंकि
घर क्यों है ये बताना है मुश्किल
सामाजिकता घर से शुरू होती है
माता का पुत्र के प्रति स्नेह, पिता का पत्नी के लिए निस्वार्थ प्रेम
एक देश को उन्नत बनाने और एक बड़े परिवार की स्थापना में सहायक है शायद
वैभव Maitreya
शायद आँगन खुशियों से परिपूर्ण
मगर सदस्यों का भी तो महत्व है
एक स्त्री एक पुरुष और एक दो छोटे छोटे बच्चे
शायद ये एक आदर्श घर है
मगर ये मात्र मेरी कल्पना है क्योंकि
घर कैसे है ये कहना मुश्किल है
प्यार, ममता, वात्सल्य, करुणा
ये घर के आंगन में खिले कुछ रंग बिरंगे फूलों की तरह हैं
जिनका आनंद घर का हर सदस्य भोगता है
मगर नफरत, स्वार्थ, एकाकी होना
इन फूलों में काँटों के सामान है शायद क्योंकि
घर क्यों है ये बताना है मुश्किल
सामाजिकता घर से शुरू होती है
माता का पुत्र के प्रति स्नेह, पिता का पत्नी के लिए निस्वार्थ प्रेम
एक देश को उन्नत बनाने और एक बड़े परिवार की स्थापना में सहायक है शायद
वैभव Maitreya
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