आज देखा उस पुरानी खिड़की से झांकती तेरी दो आँखों को
आज फिर महसूस किया उन दर्द में डूबे तेरे जज्बातों को
आज ले आया मैं अपने साथ फिर उन्हीं सर्द रातों को
आज फिर हुआ मैं मदहोश पाके तेरी हसीन बाँहों को
क्यों नहीं है तू चाहती आना इन उजालों में
वो कौन शख्स है, खोई है तू जिसके ख्यालों में
क्या वजह है तेरी इस बेरूखी की बता
थाम ले हाथ मेरा, ना मुझे यूँ सता
कर यकीन तू मेरा, मैं तेरा ही तो साया हूँ
मान कहना, साथ अपने तुझे लेने आया हूँ
है मुझे भी थामना तेरे इन नाज़ुक हाथों को
आज फिर महसूस किया उन दर्द में डूबे तेरे जज्बातों को
आज ले आया मैं अपने साथ फिर उन्हीं सर्द रातों को
आज फिर हुआ मैं मदहोश पाके तेरी हसीन बाँहों को
"वैभव मैत्रेय"
आज फिर महसूस किया उन दर्द में डूबे तेरे जज्बातों को
आज ले आया मैं अपने साथ फिर उन्हीं सर्द रातों को
आज फिर हुआ मैं मदहोश पाके तेरी हसीन बाँहों को
क्यों नहीं है तू चाहती आना इन उजालों में
वो कौन शख्स है, खोई है तू जिसके ख्यालों में
क्या वजह है तेरी इस बेरूखी की बता
थाम ले हाथ मेरा, ना मुझे यूँ सता
कर यकीन तू मेरा, मैं तेरा ही तो साया हूँ
मान कहना, साथ अपने तुझे लेने आया हूँ
है मुझे भी थामना तेरे इन नाज़ुक हाथों को
आज फिर महसूस किया उन दर्द में डूबे तेरे जज्बातों को
आज ले आया मैं अपने साथ फिर उन्हीं सर्द रातों को
आज फिर हुआ मैं मदहोश पाके तेरी हसीन बाँहों को
"वैभव मैत्रेय"