Friday, 7 September 2012

ये दर्द क्या है

ये दर्द  क्या है
ये कब पैदा हुआ, कोई बतलाये ज़रा 

गर था पहले भी,
तो क्यों न कभी ये महसूस हुआ

और गर ये अभी पैदा हुआ, 
तो क्यों कर हुआ

कहीं ऐसा तो नहीं,
ये दौड़ रहा था मेरी रगों में
मेरे ही लहू के साथ
और महसूस हुआ है अभी,
अलग होते जज्बातों के साथ

क्या था इसे भी इंतज़ार
मेरे दुखी होने का
तनहा रातों में
बेहिसाब रोने का

चाहे कितना भी बेदर्द है ये दर्द,
मगर अच्छा है
नहीं है मिलावट इसमें
ये इतना सच्चा है

ये दर्द है तभी तो वजूद ख़ुशी का है
बेबसी में ही तो मज़ा सुकून का है
बदौलत अश्कों के ही तो मोल तेरी हँसी का है

"वैभव मैत्रेय"

आलम

ये सुबह का आलम, ये मदहोश समां 
ये बारिश का मौसम, ये तेरी साँसे जवां

"वैभव मैत्रेय"
 

Wednesday, 5 September 2012

खवाइश

मोहोब्बत तुझे बेपनाह दिन रात करतें हैं 
न पूछ कैसे खुदको तुझसे हम जुदा करतें हैं 
दर्द का मेरे न हो जाये दीदार कहीं तुझे 
बस खुदा से यही दुआ हर बार करतें हैं 

"वैभव मैत्रेय"

 

बेखबर

न चला मालूम उनको, मेरे मरने का सबब
दर पर था इंतज़ार उनको, मौत लेने आई थी जब
लेटाया गया फिर दो गज ज़मीन के नीचे हमें
कर रहे हैं इंतज़ार तब से, की तुम मिलने आओगे कब

"वैभव मैत्रेय"

 

खामोश निगाहें

तेरी मसरूफियत पर मेरी निगाहें आज खामोश हैं
खोया तेरे खयालो में हूँ, न मुझको कोई होश है

"वैभव मैत्रेय"