Tuesday, 7 February 2012

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी

आज क्यों न जाने होगई नम आखें हमारी
एक दर्द उठा सिने में, जुबा भी लड़खड़ाई हमारी

तेरे जाने का एहसास, न किया था महसूस मैंने कभी
तुमसे न मिलना होगा, न ये सोचा था कभी

आज एक रिश्ते को रिश्ते से खरीदना क्यों पड़ा
आज मेरे दिल को तेरा दिल तोडना क्यों पड़ा

नहीं है आज मेरे पास कोई जवाब इन बातों का
नहीं कर सकता कोई आज अंदाजा मेरे जज्बातों का

मेरे शब्दों  मेरी आँखों में कोई ताल मेल नहीं है आज
न कोई गीत है कहीं न बज रहा है कोई साज

दर्द ही दर्द सराबोर है हर और इतना
बयां है हाले दिल की तुम से मोहबात है कितना

क्या बतलाओ बेड़ियों में जकड़े, मै अपने मासूम दिल का हाल
कुछ रिश्ते बहुत अहम है, उठे है जिन पे ये सवाल

उन्हें भी मै चाहता हूँ, पागलपन की हद तक
न करूँगा कभी जुदा, मै जिन्हें मरते दम तक

नहीं मै स्वार्थी इतना की छीनलूं ख़ुशी मै अपनों की
नहीं मै बेवफा इतना की करदूं वफ़ा नीलाम अपनी

मै चाहता हूँ तुम्हे जितना वोह मुझ तक ही है सिमित
मै चाहता हूँ तुम्हे कितना इससे तुम भी हो वाकिफ

इन जस्बातों की नहीं कोई कीमत, चाहे बेच दो ये दुनिया सारी
आज क्यों न जाने होगई नम आखें हमारी
एक दर्द उठा सिने में, जुबा भी लड़खड़ाई हमारी