Thursday, 24 May 2012

क्यों

वक़्त है खंजरों को निकाला जाए 
फिर किसी घाव को कुरेदा जाए 
फिर एक खून का दरिया बहाया जाये 
किसी जलचुकी चिता को फिर से सुलगाया जाए 
एक अंगार से उस दिए को भी जलाया जाए 
रोशन करदे जो वो शमा की जिसपे परवाने को फिर मिटाया जाए 

क्यों मगर इतनी नफरत को दे हम पनपने आज 
क्यों बेनूर हो गए वो रंगीन सपने आज
क्या किस्सा, क्या कहानी, है ये कौन सा राज़
क्या हुआ उन दुआओं का, कहा गयी वो आवाज
कि हर किसी के लिए जो दिल मरता था
किसी को कुछ भी कहने से जो डरता था
प्यार, मोहोब्बत की जो हर वक़्त बाते करता था

कहाँ गया वो शख्स जिसका पता ये सारी दुनिया थी
कहाँ खोया वो अक्स जिसका चेहरा ये मासूम मुनिया थी
वो तो कहता था सबका एक है खुदा
वो जो कहता था न हम कभी होंगे जुदा
फिर अचानक वो खो गया किन विरानो में
कैसे पहुंचा बिन मरे उन शमशानों में
कैसे पकड़ा ये खंजर, प्यार के दिवानो ने

गर मिल जाये आज खुदा तो मै उससे पूछुगा
कैसे आते है ऐसे सैलाब उससे पूछुंगा
ये कौन सी नस्ल है जो बन रही है आज हैवान
कहाँ है इनका मज़हब, कहाँ है आज भगवान्

"वैभव मैत्रेय"

 

नया मेहमान

कोटि कोटि धन्यवाद् इश्वर को इस सौगात का
देर ही से मिले इस अतिप्रिये इन्साफ का
हम जानते हैं की तुमने किया न इंतज़ार कम
हर ख़ुशी थी बेमानी, वो गम न था कम

इश्वार से यही प्रार्थना है
सभी मित्रों की भी शुभकामना है
रहे वो स्वस्थ और सुखी हमेशा
करे नाम रोशन आपका वो ऐसा
कि ना फिर रहे कोई और आशा
मिटा दे वो हर एक निराशा
करने लगें आप उसपर अभिमान
जीवन में बने वो महान इंसान