Thursday, 18 July 2013

खुशबू आती नहीं कागज़ के फूल से

खुशबू  आती नहीं कागज़ के फूल से
याद किया उन्होंने आज अचानक भूल से

याद करके वो पछताए फिर बहुत
उठाया था आखिर हमको उन्होंने धूल से

बड़ी मुश्किल अल्हैदा किया था जिसे याद से
क्यूँ मांग लिया उसीको आज फ़रियाद में
बीत जाती ज़िन्दगी खामोशियों के बीच
क्यों लायी वापस ज़िन्दगी उन्हें भूल से

खुशबू आती नहीं कागज़ के फूल से
याद किया उन्होंने आज अचानक भूल से 

याद अगर याद तक रहती तो ठीक था
फासला जो था दरमियान रहता तो ठीक था
मगर लिखा था जाने क्या मेरे नसीब में
फनाह किया मुझे, मेरे ही रकीब ने
न सीखा सबक हमने, कोई मजनूं के इश्क से
चलने लगी फिर ज़िन्दगी, प्यार की भीख से

"वैभव मैत्रेय"