Tuesday, 29 November 2011

Ehsaas

मै खोया हुआ था गहरी नींद की आगोश में
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश में

कैसे करूँगा मै बयां, वो आलम ही कितना खास था
दौलत न खरीद पाए, ये वो बेशकीमती एहसास था

मेरी साँसों को तेरी साँसों ने छुआ और मांगी हमने एक दुआ
वक़्त थम जाये वहीँ और तुझ में सिमट जाऊ मै

पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै

उस आत्म मिलन की बेला में, सब शुन्य सा हो गया
मै तेज़ होती साँसों के बीच, तुझमे ही कही खोगाया

जिस्म बेशक न मिले पर आत्मा अब एक थी
चाहा फिर बस इतना मैंने, तेरी आगोश में सोजाऊ मै

पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै
वैभव मैत्रेय