मै खोया हुआ था गहरी नींद की आगोश में
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश में
कैसे करूँगा मै बयां, वो आलम ही कितना खास था
दौलत न खरीद पाए, ये वो बेशकीमती एहसास था
मेरी साँसों को तेरी साँसों ने छुआ और मांगी हमने एक दुआ
वक़्त थम जाये वहीँ और तुझ में सिमट जाऊ मै
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै
उस आत्म मिलन की बेला में, सब शुन्य सा हो गया
मै तेज़ होती साँसों के बीच, तुझमे ही कही खोगाया
जिस्म बेशक न मिले पर आत्मा अब एक थी
चाहा फिर बस इतना मैंने, तेरी आगोश में सोजाऊ मै
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै
वैभव मैत्रेय
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश में
कैसे करूँगा मै बयां, वो आलम ही कितना खास था
दौलत न खरीद पाए, ये वो बेशकीमती एहसास था
मेरी साँसों को तेरी साँसों ने छुआ और मांगी हमने एक दुआ
वक़्त थम जाये वहीँ और तुझ में सिमट जाऊ मै
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै
उस आत्म मिलन की बेला में, सब शुन्य सा हो गया
मै तेज़ होती साँसों के बीच, तुझमे ही कही खोगाया
जिस्म बेशक न मिले पर आत्मा अब एक थी
चाहा फिर बस इतना मैंने, तेरी आगोश में सोजाऊ मै
पाकर तुझे बाँहों में अपनी होगया मदहोश मै
वैभव मैत्रेय