Thursday, 7 June 2012

कोशिश

कहाँ मुश्किल है समझना, गर करे कोई कोशिश
इन कोशिशों के दम पर ही तो आज चाँद आबाद है

नहीं मुश्किल मोती को पानी में खोजना
गर की जाए कोशिश तो मुमकिन ये भी जनाब है
एक धोती पहन कर चला था एक महात्मा एक दिन
कोशिशों की बदोलत आज ये देश आज़ाद है

गर आये हो दुनिया में, करो कोशिश संभल कर चलने की
डूब जाओगे वरना किनारे पर, ये वो अज़ाब है

"वैभव मैत्रेय"

Monday, 4 June 2012

दिल की क्यों न कभी सुनी थी मैंने

दिल की क्यों न कभी सुनी थी मैंने 
आज अचानक सोचा तो ये जाना मैंने 

हम जो चाहते थे हमेशा पाना 
हम चाहते थे जिस डगर पे जाना 
वो दिल से होकर ही है जाती
नहीं फिर क्या हमें ये एहमियत समझ में आती 

क्यों हर बार फैसला दिमाग ही है करता 
क्यों हर रोज़ ये दिल बेचारा, तिल तिल के है मरता
 
किस शै से है हर बार तू डरता
 

एक बार दिल के कही, करके तो देख 
एक बार गिर कर फिर संभल कर तो देख

एक बार तो बहने दे  किनारों के ज़िन्दगी को

एक बार तो दिखा तू भी दिया इस रौशनी को 


क़यामत खुद कायनात बन जाएगी
मौत फिर नयी ज़िन्दगी सजाएगी
दुनिया और रोमानी हो जाएगी
तेरी ज़िन्दगी, दुनिया में एक मिसाल बन जाएगी
न किसी का खौफ होगा, न कोई अफ़सोस होगा
न कल की कोई चिंता, न आज पर फिर तुझे कोफ़्त होगा

एक बार इ दोस्त इस दिल की भी
एक बार कर प्यार, एक बार नए ख्वाब बुनले


"वैभव मैत्रेय"