कहाँ मुश्किल है समझना, गर करे कोई कोशिश
इन कोशिशों के दम पर ही तो आज चाँद आबाद है
नहीं मुश्किल मोती को पानी में खोजना
गर की जाए कोशिश तो मुमकिन ये भी जनाब है
एक धोती पहन कर चला था एक महात्मा एक दिन
कोशिशों की बदोलत आज ये देश आज़ाद है
गर आये हो दुनिया में, करो कोशिश संभल कर चलने की
डूब जाओगे वरना किनारे पर, ये वो अज़ाब है
"वैभव मैत्रेय"
इन कोशिशों के दम पर ही तो आज चाँद आबाद है
नहीं मुश्किल मोती को पानी में खोजना
गर की जाए कोशिश तो मुमकिन ये भी जनाब है
एक धोती पहन कर चला था एक महात्मा एक दिन
कोशिशों की बदोलत आज ये देश आज़ाद है
गर आये हो दुनिया में, करो कोशिश संभल कर चलने की
डूब जाओगे वरना किनारे पर, ये वो अज़ाब है
"वैभव मैत्रेय"