Monday, 6 August 2012

कई बार तेरी बातें मेरे लिखने का सबब होती है

कई बार तेरी बातें मेरे लिखने का सबब होती है
ये दिल बेकाबू होता है जब दुनिया चैन से सोती है

कभी रोकना तेरा, थाम कर हाथ को मेरे
नहीं यहाँ गुंजाईश अंधेरों की, तेरे पास वो ज्योति है

छुकर जिस्म को तेरे, मेरा फनाह हो जाना
बैठ कर पास में तेरे, तेरी साँसों में खो जाना
करके बंद आँखें अपनी, तेरी दुनियाँ देख पाना
हँसता हूँ अकेले में अकसर मै बैठकर यारों
मै जागता हूँ सारी रात ओर वो चैन से सोती है

हाथ रखकर गालों पर, रहूँ तुझे दिन-रात मै सुनता
बिन सोये न जाने रहा कितने ख्वाब मै बुनता
मै जब गुनगुनाता हूँ, वो प्रेम के गीत संजोती है

कई बार तेरी बातें मेरे लिखने का सबब होती है
ये दिल बेकाबू होता है जब दुनिया चैन से सोती है

"वैभव मैत्रेय"