Wednesday, 7 December 2011

चाहत का दर्द

कुछ वक़्त मुझे भी चाहिए आज मेरे लिए
एक हमदर्द कही मिल जाये मुझे आज मेरे लिए

दिल में एक दर्द का सैलाब है उठा
थोडा सा प्यार चाहिए मुझे आज मेरे लिए

हर शख्स को मेरी ही ज़रुरत होती क्यों है
एक हमराज़ मुझे भी चाहिए आज मेरे लिए

मेरा मुस्कराना मेरी आदत थी कभी
कुछ आंसू बहाने हैं मुझे आज मेरे लिए

कुछ वक़्त भी चाहिए मुझे आज मेरे लिए

मेरी ख़ामोशी को आज मुझ ही से छीन ले जो आकर
एक आवाज़ बुलंद चाहिए मुझे आज मेरे लिए

ना जाने क्यों होगया आज मजबूर में इतना
इस खौफ से उबरना है मुझे आज मेरे लिए

कुछ वक़्त मुझे भी चाहिए आज मेरे लिए

कुछ अन्धेरें आज ना जाने क्यों खींचे है मुझको
एक किरण चाहिए मुझे आज मेरे लिए

प्यास से क्यों सूख गया आज मेरा भी गला
दो बूँद पानी चाहिए मुझे आज मेरे लिए

कैसे बतलाऊ इन आखों में बहते हुए पानी का मतलब
इनको मोती है बनाना मुझे आज मेरे लिए

हर सांस पर मेरी तेरा नाम है खुदा
एक दुनिया नयी चाहिए मुझे आज मेरे लिए

कुछ वक़्त मुझे भी चाहिए आज मेरे लिए


वैभव मैत्रेय