एक रेशमी एहसास था
कल जो भी मेरे पास था
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
वो कितना मुझको खास था
एक लम्हा सुरमई
छोड़ कर मेरे करीब
दूर जो चला गया
कल रात से उदास था
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
वो कितना मुझको खास था
"वैभव मैत्रेय"
कल जो भी मेरे पास था
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
वो कितना मुझको खास था
एक लम्हा सुरमई
छोड़ कर मेरे करीब
दूर जो चला गया
कल रात से उदास था
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
वो कितना मुझको खास था
"वैभव मैत्रेय"