Friday, 15 February 2013

क्या वैलेंटाइन डे एक पाप है ?

कल रात अचानक सडकों पर
ख़ामोशी देखी चारों ओर

सन्नाटा था फैला हुआ
न हीं था कोई गाड़ियों का शोर

एक तरफ तो जश्न था डे वैलेंटाइन का
दौर चल रहा था अंग्रेजी - देसी वाइन का
बाजारों में भी गज़ब की भीड़ थी
गाडी चलने के लिए, कहीं भी न छीड थी

 और वहीँ दूसरी तरफ

रोटी को भी तरस रहे
जाने कितने परिवार थे
प्रेम व्यर्थ था उनके लिया
ना बाँहों के ही कोई हार थे

अपने ही आंसू जो थे पी रहे
दो बूँद पानी की जगह
कट जाये ये रात भी
कर रहे थे ये दुआ

सोचता हूँ ये देख कर
ये पैसा भी कमाल है
जहाँ एक के लिए सिर्फ मस्ती हैं
वहीँ किसी की ज़िन्दगी का सवाल है

लुटा रहा है एक, इसको दोनों हाथ से
बिलख रहा है दूसरा, भूखा कल रात से

कहते है आज़ाद देश है
फिर क्यों दशा है लोगों के ऐसी
किसने बनाया ये भेष है

बहुत दुःख की बात है
ये जो काली स्याह रात है
किसी की दिलरुबा है ये
और किसी के लिए अभिशाप है
ऐसे में ऐ दोस्तों

क्या वैलेंटाइन डे एक पाप है ?


"वैभव मैत्रेय"






 

मेरी साँसों में होती हो

मेरी साँसों में होती हो
मेरे ख्वाबों में आती हो
न दिखाया कभी
जिन जस्बातों को मैंने
जानेबहार तुम उन
एहसासों में होती हो

खो जाती हो जब
उजालों में कहीं तुम
अक्सर तब तुम
मेरी सर्द रातों में होती हो

पास आकर भी जब
तुम दूर होती हो
मुझसे जुदा होने का
दर्द भी सहती हो

ज़बां से कभी कुछ
न कहा तुमने
लेकिन हजारों किस्से
अपनी आँखों से कहती हो

"वैभव मैत्रेय"