Wednesday, 21 August 2013

कोई रिश्ता ज़रूर है

तेरे मेरे दरमियाँ कोई रिश्ता ज़रूर है
यूँ ही नहीं देखा जो तेरी आँखों  में नूर है

मसरूफ सिर्फ तुम नहीं जानिब हम भी हैं
दुनियादारी से थोडा मुखातिब यक़ीनन हम भी हैं 

दिन रात मेरी ज़िन्दगी में जो आया सुरूर हैं
यकीं है मुझे, तेरी आँखों का कसूर हैं

नजाने किस बात का गुमां है तुम्हे
तुमने भी प्याला इश्क ये पिया तो ज़रूर है

क्यूँ हाथ थाम के मुझे करीब बुला लिया
दिल देकर क्यों अपना मेरा दिल चुरा लिया
तराना भी जो दिल है गा रहा
आप ही का हुज़ूर है


तेरे मेरे दरमियाँ कोई रिश्ता ज़रूर है
यूँ ही नहीं देखा जो तेरी आँखों  में नूर है

करना सनम की बातें हो कर सनम से दूर
आना करीब आपका, होकर नशें में चूर
मोहब्बत पे हमें आपकी बेपनाह गुरूर है

तेरे मेरे दरमियाँ कोई रिश्ता ज़रूर है
यूँ ही नहीं देखा जो तेरी आँखों  में नूर है

"वैभव मैत्रेय"