साधनों के आभाव में मानव ने प्रगति की
साधन सुलभ होते ही प्रगति रोक दी
जब ना था सुलभ साधनों का नाम
तब थोडा बहुत तो लेते ही थे मस्तिष्क से काम
सुलभ साधन जैसे ही पास आये
स्वस्थ व्यक्ति भी आलसी और बीमार नज़र आये
इसलिए साधनों के आभाव में जीना सीखे
साधन हो ना हो देश की प्रगति ना रोके
वैभव मैत्रेय
साधन सुलभ होते ही प्रगति रोक दी
जब ना था सुलभ साधनों का नाम
तब थोडा बहुत तो लेते ही थे मस्तिष्क से काम
सुलभ साधन जैसे ही पास आये
स्वस्थ व्यक्ति भी आलसी और बीमार नज़र आये
इसलिए साधनों के आभाव में जीना सीखे
साधन हो ना हो देश की प्रगति ना रोके
वैभव मैत्रेय
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