Saturday, 22 September 2012

तेरे बिन

पत्थर में भी फूलों नें जगह पायी है
तेरे बिन हर गुलशन में भी तन्हाई है

चिरागों ने भी जो रौशनी न दी मुझे
तू उन्हें अपने दामन में भर लायी है

तेरे लबों का करूँ मैं क्या बयां
आज भी मेरी साँसों में तेरी गरमाई है

हर रात उलझ जाता हूँ तेरी ज़ुल्फ़ों में
ये सोच कर की दिन में घटाएँ छाई हैं

"मेरी प्यारी बीवी के लिए"

"वैभव मैत्रेय"
 

Friday, 21 September 2012

जब तुम उदास होती हो

जब तुम उदास होती हो
तब सब उदास होता है
तन्हाई के आलम में
ये दिल भी तब रोता है

जब तुम महकती हो
ये दिल तब चहकता है
मदहोशी के आलम में
ये दिल भी बहकता है

जब तुम उदास होती हो
तब सब उदास होता है

जब तुम चली जाती हो
एक ख़ामोशी छा जाती है
धुंध के आलम में
ये दिल भी भटकता है

और

जब तुम आ जाती हो
इक बहार सी आ जाती है
संगीत के मौसम सा
ये मन नाचता है

जब तुम उदास होती हो
तब सब उदास होता है

बस यही दुआ है मेरी रब से
कि तुम महेकती हुई आओ
इस दिल को बहकाओ
इस मन को नचाओ

क्यूंकि

जब तुम उदास होती हो
तब सब उदास होता है

"वैभव मैत्रेय"
 

हर जन्म तेरे साथ जीना है

हर  कदम तेरे साथ चलना है
बस एक तेरे प्यार में जलना है
है गर ये रिश्ता  सात जन्मों का
तो हर जन्म तेरे साथ जीना है
और हर जन्म तेरे साथ मरना है

"वैभव मैत्रेय"