क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
करके बंद आखें वो तेरा मुस्कराना
बना के बहाना तेरा वो मिलने भी आना
मेरी शामों को भी वो रंगीं बनाना
हवाला मोहोब्बत का देकर के हमको
अक्सर तेरा हमें आजमाना
क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
मैं उस वक़्त को वापस बता लाऊ कैसे
सपनों को फिर से सजाऊ मैं कैसे
तेरी गर्म साँसे भुलाऊ मैं कैसे
चाहत है दिल में, दिखाऊ वो कैसे
आसां नहीं यू हमें भूल पाना
क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
"वैभव मैत्रेय"
करके बंद आखें वो तेरा मुस्कराना
बना के बहाना तेरा वो मिलने भी आना
मेरी शामों को भी वो रंगीं बनाना
हवाला मोहोब्बत का देकर के हमको
अक्सर तेरा हमें आजमाना
क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
मैं उस वक़्त को वापस बता लाऊ कैसे
सपनों को फिर से सजाऊ मैं कैसे
तेरी गर्म साँसे भुलाऊ मैं कैसे
चाहत है दिल में, दिखाऊ वो कैसे
आसां नहीं यू हमें भूल पाना
क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
"वैभव मैत्रेय"