Friday, 13 September 2013

एक रिश्ता मुकम्मल रहता है

कभी नज़रें इनायत से
कभी शिकवे शिकायत से 
एक रिश्ता मुकम्मल रहता है
तेरी दिलकश बातों से

कभी मजबूर कर देना
कभी मजबूर हो जाना
मांगना एक दूसरे से फिर माफ़ी
हर एक हिमाकत पे

कभी तकरार की बातें
कभी वो प्यार की रातें
खुदको फनाह करके
देना प्यार की सौगातें

एक रिश्ता मुकम्मल रहता है
तेरी दिलकश बातों से

कभी आना करीब तेरा
कभी खुद से जुदा करना
कभी ना मिलने की बातें
कभी पास आने के तेरे वादे
एक रिश्ता मुकम्मल रहता है
तेरी दिलकश बातों से

"वैभव मैत्रेय"