सबके मन को रंगने आज
तेरे मेरे आँगन में आज
होली आई रे
कोई सूखा रहा, कोई गीला हुआ
कोई होश में तो कोई बेहोश हुआ
गैरों को भी अपना बनाने
होली आई रे
कहीं बच्चों का शोर था
एक हुडदंग सा चारो ओर था
भांग और गुंझिया पर ज़ोर था
गोपियों को आज भिगोने
कान्हा के टोली आई रे
होली आई रे
"वैभव मैत्रेय"
तेरे मेरे आँगन में आज
होली आई रे
कोई सूखा रहा, कोई गीला हुआ
कोई होश में तो कोई बेहोश हुआ
गैरों को भी अपना बनाने
होली आई रे
कहीं बच्चों का शोर था
एक हुडदंग सा चारो ओर था
भांग और गुंझिया पर ज़ोर था
गोपियों को आज भिगोने
कान्हा के टोली आई रे
होली आई रे
"वैभव मैत्रेय"