Thursday, 28 March 2013

होली आई रे

सबके मन को रंगने आज
तेरे मेरे आँगन में आज
होली आई रे

कोई सूखा रहा, कोई गीला हुआ
कोई होश में तो कोई बेहोश हुआ
गैरों को भी अपना बनाने
होली आई रे

कहीं बच्चों का शोर था
एक हुडदंग सा चारो ओर था
भांग और गुंझिया पर ज़ोर था

गोपियों को आज भिगोने
कान्हा के टोली आई रे
होली आई रे

"वैभव मैत्रेय"