ना जानते हुए भी हमेशा महसूस करता हूँ अपने चारो तरफ एक खुसबू
ये तो नहीं जानता की ये किसी के बदन की महक है या फिर प्रकृति ने अंगड़ाई ली है
कितनी ही बार महसूस किया की मेरा मन एक बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ता, दौड़ता ही जा रहा है
कितनी बार काबू में करना चाहता हूँ मन की इच्छाओं को,
मगर सब व्यर्थ नजर आता है
फिर एक नया ख्याल पैदा हुआ
क्या ये परिस्थितियां सब के जीवन में आती होंगी
ये तो मात्र एक, सिर्फ एक प्रश्न है
ना जाने ऐसे कितने ही प्रश्न रोज़ मेरे सागर रुपी मन की लहरों में उछलते बैठते रहते हैं !
पर सब या ज्यादातर का अंत या कहिये परिणाम शुन्य ही निकलता है
मुझे किसी ऐसे साथी की तलाश है जो मुझे दिशाहीन होने से बचा सके,
जो मुझे सहारा देकर हर कठ्नाई से लड़ने का !
कब समाप्त होगी ये तलाश ?
ये तो नहीं जानता की ये किसी के बदन की महक है या फिर प्रकृति ने अंगड़ाई ली है
कितनी ही बार महसूस किया की मेरा मन एक बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ता, दौड़ता ही जा रहा है
कितनी बार काबू में करना चाहता हूँ मन की इच्छाओं को,
मगर सब व्यर्थ नजर आता है
फिर एक नया ख्याल पैदा हुआ
क्या ये परिस्थितियां सब के जीवन में आती होंगी
ये तो मात्र एक, सिर्फ एक प्रश्न है
ना जाने ऐसे कितने ही प्रश्न रोज़ मेरे सागर रुपी मन की लहरों में उछलते बैठते रहते हैं !
पर सब या ज्यादातर का अंत या कहिये परिणाम शुन्य ही निकलता है
मुझे किसी ऐसे साथी की तलाश है जो मुझे दिशाहीन होने से बचा सके,
जो मुझे सहारा देकर हर कठ्नाई से लड़ने का !
कब समाप्त होगी ये तलाश ?
Nice words Vaibhav
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