सर्द रातों में गर्मी को खोजता रहा
दर्द नहीं था फिर भी चीखता रहा
चीख एक शुन्य में जाती रही
अनगिनत आवाज़े मुझे पास बुलाती रही
आवाजे कुछ जानी पहचानी सी लगी
एहसास का दर्द लिए गाती सी लगी
कुछ भी हो, गाना जो भी गा रहा था
शायद मुझे भी अपने पास बुला रहा था
जज्बातों की दुनिया में है एहसासों की कीमत
मगर खरीदना मेरे लिए नहीं है जायज़
वैभव मैत्रेय
दर्द नहीं था फिर भी चीखता रहा
चीख एक शुन्य में जाती रही
अनगिनत आवाज़े मुझे पास बुलाती रही
आवाजे कुछ जानी पहचानी सी लगी
एहसास का दर्द लिए गाती सी लगी
कुछ भी हो, गाना जो भी गा रहा था
शायद मुझे भी अपने पास बुला रहा था
जज्बातों की दुनिया में है एहसासों की कीमत
मगर खरीदना मेरे लिए नहीं है जायज़
वैभव मैत्रेय
Dilemma..n decision
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