Monday, 5 November 2012

क्यों ये फासले हैं

क्यों ये फासले हैं
क्यों ये दूरियां हैं
क्यों आज खामोश है तू
क्यों ये मजबूरियां हैं

कहाँ मुमकिन है की ये
याद ना आये तेरी
कहाँ मुश्किल है बता
क्यों ये दूरियाँ हैं

जानता हूँ नहीं चाहती तुम भी
देखना आँख में आंसू मेरी
फिर किस बात की ये हमें
मिल रही सजा है

क्यों ये फासले हैं
क्यों ये दूरियां हैं
क्यों आज खामोश है तू
क्यों ये मजबूरियां हैं

है परेशान तुभी
देख कर हालत ये मेरी
मेरी बाँहों में नहीं तू
बढ़ रही क्यों दूरियां हैं

"वैभव मैत्रेय"
 

1 comment:

  1. प्रेम की कोमल अभिव्यक्ति....
    :-)

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