Tuesday, 6 November 2012

कैसा ये मौसम आया है

कैसा ये मौसम आया है
न जाने क्या पैगाम लाया है
दिल और दिमाग पर आज मेरे
तेरा ही जादू  छाया है

कशमकश में रात गुज़री
कशमकश में हुई सूबह
ये हवा का ठंडा झोंका
तेरा ही पैगाम लाया है
दिल और दिमाग पर आज मेरे
तेरा ही जादू छाया है

गगन भी आज रंगीन है
परिंदे भी लग रहे हसीन हैं
फूलों पे बैठे भवरों ने
ये जो प्रेम गीत गया है
दिल और दिमाग पर आज मेरे
तेरा ही जादू छाया है

कैसा ये मौसम आया है
न जाने क्या पैगाम लाया है

हैं हैरान सभी भीड़ में आज मुझपर
ना देखा किसीने तुमसा कोई दिलबर
खुशनसीबी पे मेरी, परियों ने भी आज
मिलन का जशन मनाया है

दिल और दिमाग पर आज मेरे
तेरा ही जादू छाया है

"वैभव मैत्रेय"

No comments:

Post a Comment