जब भी आदमी आदमी से पशेमां होगा
ज़ाहिर है वहां कोई हैवानियत का निशां होगा
जिस दौलत को आज तुम समझते अजीज़ हो
फ़रिश्ता ए मौत के आगे न इसका कोई निशां होगा
दुखी हो देख कर जिन अपनों और परायों को
छुटेंगे सभी पीछे, जब मौत का फरमान होगा
जब भी आदमी आदमी से पशेमां होगा
ज़ाहिर है वहां कोई हैवानियत का निशां होगा
कर बंदगी ताउम्र तू सिर्फ अपने खुदा की
यहाँ तो था, वहां भी वो ही सर परस्त होगा
"वैभव मैत्रेय"
Ati sundar
ReplyDeletethanks Aman
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