कुछ क़दमों के निशां भी देखें हमने
चले वो एक बार ही और हुजूम पीछे चल पड़ा
देखा उन चरागदीनो को भी हमने
कि पनाह में जिनकी अँधेरा ही पिघल पड़ा
"वैभव मैत्रेय"
चले वो एक बार ही और हुजूम पीछे चल पड़ा
देखा उन चरागदीनो को भी हमने
कि पनाह में जिनकी अँधेरा ही पिघल पड़ा
"वैभव मैत्रेय"
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