Wednesday, 18 September 2013

तेरी यादें

क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना
करके बंद आखें वो तेरा मुस्कराना
बना के बहाना तेरा वो मिलने भी आना
मेरी शामों को भी वो रंगीं बनाना
हवाला मोहोब्बत का देकर के हमको
अक्सर तेरा हमें आजमाना

क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना

मैं उस वक़्त को वापस बता लाऊ कैसे
सपनों को फिर से सजाऊ मैं कैसे
तेरी गर्म साँसे भुलाऊ मैं कैसे
चाहत है दिल में, दिखाऊ वो कैसे
आसां नहीं यू हमें भूल पाना

क्यूँ आता है मुझे याद वो गुज़रा ज़माना

"वैभव मैत्रेय"

1 comment:

  1. बहुत खूब..
    बहुत ही बेहतरीन
    और मनभावन रचना...
    :-)

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