तेरी एक हंसी पे मैं हस दिया
तेरी कातिल निगाहों में यूँ फस गया
तेरे रूप के सदके मैं क्या करूँ
तेरा मासूम चेहरा दिल में बस गया
तेरी बातों में एक शरारत सी है
तेरे लबों पे एक मुस्कराहट से है
तेरे दीदार को ए जानेमन
मेरा बेचैन दिल भी मचल गया
तेरी एक हंसी पे मैं हस दिया
तेरी कातिल निगाहों में यूँ फस गया
तेरी ख़ामोशी भी नहीं बेज़ुबां
तेरी बातों पे लुटा दूँ मैं दोनों जहाँ
चल आज तुझे लेकर चलूँ वहां
मेरा इश्क मुकम्मल हो जाये जहाँ
"वैभव मैत्रेय"
तेरी कातिल निगाहों में यूँ फस गया
तेरे रूप के सदके मैं क्या करूँ
तेरा मासूम चेहरा दिल में बस गया
तेरी बातों में एक शरारत सी है
तेरे लबों पे एक मुस्कराहट से है
तेरे दीदार को ए जानेमन
मेरा बेचैन दिल भी मचल गया
तेरी एक हंसी पे मैं हस दिया
तेरी कातिल निगाहों में यूँ फस गया
तेरी ख़ामोशी भी नहीं बेज़ुबां
तेरी बातों पे लुटा दूँ मैं दोनों जहाँ
चल आज तुझे लेकर चलूँ वहां
मेरा इश्क मुकम्मल हो जाये जहाँ
"वैभव मैत्रेय"
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