बातों ही बातों में आँख लग गयी
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी खामोश सी
सुबह वो हमसे दूर हो गए
बात जो जुबां पे थी, दिल में दब गयी
"वैभव मैत्रेय"
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी खामोश सी
सुबह वो हमसे दूर हो गए
बात जो जुबां पे थी, दिल में दब गयी
"वैभव मैत्रेय"
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