Monday, 5 August 2013

देव अंश

कुछ रूहानी ताकतों ने
मुझसे मुझको जब किया जुदा
थम गयी हर सांस मेरी
मिल गया मुझको खुदा

रेत के बवंडरों से
वो दूर मुझको ले गया
वो हरी भरी वादियों की
खुशबू भी मुझको दे गया
कितनी हसीन है दोस्तों
उसकी हर एक अदा

कुछ रूहानी ताकतों ने
मुझसे मुझको जब किया जुदा
थम गयी हर सांस मेरी
मिल गया मुझको खुदा

लग रहा था ये मुझे
पाजाऊंगा मैं आज विजय
इस जन्म मृत्यु के चक्र से
न रहेगा ये जिस्म लदा
कुछ रूहानी ताकतों ने
मुझसे मुझको जब किया जुदा
थम गयी हर सांस मेरी
मिल गया मुझको खुदा

ना कहीं कोई शोर है
कितनी मधुर सुगंध है
कितनी संगीतमय भोर है
प्रकाश ओत प्रोत है
ये जो सफ़ेद दिव्य ज्योत है
कर रही मुझे शुद्ध है
सिर्फ प्रेम का मुझमे वास है
कोई कहीं न क्रुद्ध है
इश्वरत्व चारो ओर है
मुझमें ही मैत्रेय बुद्ध हैं

मैं ही देव अंश हूँ
उसी का बढ़ता वंश हूँ
मानव कल्याण के लिए
किया था खुदसे जुदा

कुछ रूहानी ताकतों ने
मुझसे मुझको जब किया जुदा
थम गयी हर सांस मेरी
मिल गया मुझको खुदा

"वैभव मैत्रेय"
 

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