Thursday, 27 December 2012

तेरी नज़रें

तेरी नज़रों ने आज पूछे
हैं कई सवाल मुझसे
जो न कह सका मैं तुझसे,
कह दूँगा आज रब से

शरमाना तेरा मुझसे
ना अब कबूल होगा
बैठे हैं इंतज़ार में
गोया नजाने कबसे

एक शोला था कहीं भड़का
साँसों के दर्मिया मेरी
छुकर बुझादी तूने
प्यासे थे लैब ये कबसे

तेरी नज़रों ने आज पूछे
हैं कई सवाल मुझसे
जो न कह सका मैं तुझसे,
कह दूँगा आज रब से

गालों पे हाथ रख कर
सुनना वो तेरी बातें
ना सुनी फिर कोई कहानी
एक बार सुन के तुझसे

आगोश में तेरी रहबर
यूँही पड़ा रहूँगा
हो जाऊंगा फनांह मैं
गर बिछडना पड़ा जो तुझसे

तेरी नज़रों ने आज पूछे
हैं कई सवाल मुझसे
जो न कह सका मैं तुझसे,
कह दूँगा आज रब से

"वैभव मैत्रेय"

No comments:

Post a Comment