तबियत जो आपकी कुछ नासाज़ है
ये भी क्या कोई अदा नयी जनाब है
पूछते है खैरियत जो लोगों की अक्सर
कहिये क्यों ऐसे आज खुदके मिज़ाज हैं
दुआओं का हमारी असर आप भी देखेंगे
चेहरे पे आपके फूल फिर से चेहेकेंगे
आपके ही दम पे तो ये महफ़िल आबाद है
आपसे रूबरू होना, हर दिल का खवाब है
मगर अफ़सोस
तबियत आपकी आज कुछ नासाज़ है
भरना वो आहें गर्म, अजी आपका हुज़ूर
निगाहों से बह रही, गज़ब की शराब है
करना वो तकाज़ा, हर बार आपका
लिखी है ये ग़ज़ल, कह रहे आदाब है
मगर अफ़सोस
तबियत आपकी क्यूँ नासाज़ है
ये भी क्या कोई अदा नयी जनाब है
"वैभव मैत्रेय"
ये भी क्या कोई अदा नयी जनाब है
पूछते है खैरियत जो लोगों की अक्सर
कहिये क्यों ऐसे आज खुदके मिज़ाज हैं
दुआओं का हमारी असर आप भी देखेंगे
चेहरे पे आपके फूल फिर से चेहेकेंगे
आपके ही दम पे तो ये महफ़िल आबाद है
आपसे रूबरू होना, हर दिल का खवाब है
मगर अफ़सोस
तबियत आपकी आज कुछ नासाज़ है
भरना वो आहें गर्म, अजी आपका हुज़ूर
निगाहों से बह रही, गज़ब की शराब है
करना वो तकाज़ा, हर बार आपका
लिखी है ये ग़ज़ल, कह रहे आदाब है
मगर अफ़सोस
तबियत आपकी क्यूँ नासाज़ है
ये भी क्या कोई अदा नयी जनाब है
"वैभव मैत्रेय"
No comments:
Post a Comment