हँसा था एक बार मैं जब,
थे आंसू आँख में तब भी
भरी थी नीद आँखों में
मैं जाग़ा नींद से जब भी
मज़ा धुप में अक्सर जो
बारिश का आता है
न कीमत थी उसकी कोई
न है कोई कीमत उसकी अब भी
सुनाई दे जो ख़ामोशी में
वो एहसास तुमसे है
ना पहले ही जुदा थे हम
न अलग कर पाएंगे वो अब भी
हँसा था एक बार मैं जब,
थे आंसू आँख में तब भी
वो शर्माना तेरा हरबार
और नज़रें झुका लेना
मोहोब्बत बेपनाह तुमसे
हमें है आज भी, अब भी
बचा कर आँख लोगो से
वो करना, तेरा बातें
जोश भरता था साँसों में
तेज करता है धड़कन अब भी
हँसा था एक बार मैं जब,
थे आंसू आँख में तब भी
"वैभव मैत्रेय"
थे आंसू आँख में तब भी
भरी थी नीद आँखों में
मैं जाग़ा नींद से जब भी
मज़ा धुप में अक्सर जो
बारिश का आता है
न कीमत थी उसकी कोई
न है कोई कीमत उसकी अब भी
सुनाई दे जो ख़ामोशी में
वो एहसास तुमसे है
ना पहले ही जुदा थे हम
न अलग कर पाएंगे वो अब भी
हँसा था एक बार मैं जब,
थे आंसू आँख में तब भी
वो शर्माना तेरा हरबार
और नज़रें झुका लेना
मोहोब्बत बेपनाह तुमसे
हमें है आज भी, अब भी
बचा कर आँख लोगो से
वो करना, तेरा बातें
जोश भरता था साँसों में
तेज करता है धड़कन अब भी
हँसा था एक बार मैं जब,
थे आंसू आँख में तब भी
"वैभव मैत्रेय"
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