Friday, 7 September 2012

ये दर्द क्या है

ये दर्द  क्या है
ये कब पैदा हुआ, कोई बतलाये ज़रा 

गर था पहले भी,
तो क्यों न कभी ये महसूस हुआ

और गर ये अभी पैदा हुआ, 
तो क्यों कर हुआ

कहीं ऐसा तो नहीं,
ये दौड़ रहा था मेरी रगों में
मेरे ही लहू के साथ
और महसूस हुआ है अभी,
अलग होते जज्बातों के साथ

क्या था इसे भी इंतज़ार
मेरे दुखी होने का
तनहा रातों में
बेहिसाब रोने का

चाहे कितना भी बेदर्द है ये दर्द,
मगर अच्छा है
नहीं है मिलावट इसमें
ये इतना सच्चा है

ये दर्द है तभी तो वजूद ख़ुशी का है
बेबसी में ही तो मज़ा सुकून का है
बदौलत अश्कों के ही तो मोल तेरी हँसी का है

"वैभव मैत्रेय"

3 comments:

  1. आज 09/09/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. वाह...
    बहुत सुन्दर और सार्थक रचना..
    लफ्ज -लफ्ज मन को भने वाले है
    एक गहरे अहसास लिए है..
    शानदार...
    :-)

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