न चला मालूम उनको, मेरे मरने का सबब
दर पर था इंतज़ार उनको, मौत लेने आई थी जब
लेटाया गया फिर दो गज ज़मीन के नीचे हमें
कर रहे हैं इंतज़ार तब से, की तुम मिलने आओगे कब
"वैभव मैत्रेय"
दर पर था इंतज़ार उनको, मौत लेने आई थी जब
लेटाया गया फिर दो गज ज़मीन के नीचे हमें
कर रहे हैं इंतज़ार तब से, की तुम मिलने आओगे कब
"वैभव मैत्रेय"
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