क्या फर्क है दो इंसानों में
एक शांत है, एक अशांत है
हैं दोनों दिखते एक जैसे ही
एक अमीर है, एक गरीब है
चीखते दोनों ही हैं
एक दर्द देकर, एक दर्द पाकर
है भूख भी दोनों ही को
इसे पैसे की, उसे रोटी की
है प्रेम एक सामान भी
देदें अपनों के लिए जान भी
निर्दई भी है एक से
एक बचने के लिए और एक मारने के लिए
लेकिन यह कौन है जो है तीसरा
जो गरीबी में भी शांत है
न जिसका कोई देश है, न जिसका कोई प्रान्त है
ना पैसे का जिसे घमंड कोई
सोता है खा कर रोटी दो ही
है दर्द अपने में समेटे हुए
जला रहा प्रेम के दिए
है मारना जिसने सिखा नहीं
है जीवन मृत्यु से परे कहीं
मगर मै कैसे उसे खोजता
रहता ता उम्र यही सोचता
कि क्या वो सिर्फ मेरे ख्यालों में है
इन अनसुलझे सवालों में है
मै इसी उधेड़ बुन में था
कि आवाज़ दी सुनाई मुझे
कि क्यों हो इतना परेशान तुम
है जरुरत न करने की कोई जतन
ये तीसरा हम सभी में है
आदि से अंत तक हर सदी में है
ये बीज है उसी ईश का
जिसने तुम्हे ये जीवन दिया
ना कहीं कोई दो ही थे और ना तीसरा कहीं पैदा हुआ
हैं लड़ रहे हैं खुदी से हम
हो गए एक से दो हम
और कितनी अजीब बात है
जिस तीसरे को हम खोज रहे
वो हम ही में विद्यमान है
"वैभव मैत्रेय "
एक शांत है, एक अशांत है
हैं दोनों दिखते एक जैसे ही
एक अमीर है, एक गरीब है
चीखते दोनों ही हैं
एक दर्द देकर, एक दर्द पाकर
है भूख भी दोनों ही को
इसे पैसे की, उसे रोटी की
है प्रेम एक सामान भी
देदें अपनों के लिए जान भी
निर्दई भी है एक से
एक बचने के लिए और एक मारने के लिए
लेकिन यह कौन है जो है तीसरा
जो गरीबी में भी शांत है
न जिसका कोई देश है, न जिसका कोई प्रान्त है
ना पैसे का जिसे घमंड कोई
सोता है खा कर रोटी दो ही
है दर्द अपने में समेटे हुए
जला रहा प्रेम के दिए
है मारना जिसने सिखा नहीं
है जीवन मृत्यु से परे कहीं
मगर मै कैसे उसे खोजता
रहता ता उम्र यही सोचता
कि क्या वो सिर्फ मेरे ख्यालों में है
इन अनसुलझे सवालों में है
मै इसी उधेड़ बुन में था
कि आवाज़ दी सुनाई मुझे
कि क्यों हो इतना परेशान तुम
है जरुरत न करने की कोई जतन
ये तीसरा हम सभी में है
आदि से अंत तक हर सदी में है
ये बीज है उसी ईश का
जिसने तुम्हे ये जीवन दिया
ना कहीं कोई दो ही थे और ना तीसरा कहीं पैदा हुआ
हैं लड़ रहे हैं खुदी से हम
हो गए एक से दो हम
और कितनी अजीब बात है
जिस तीसरे को हम खोज रहे
वो हम ही में विद्यमान है
"वैभव मैत्रेय "
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