एक ख्याल तेरा मुझे तेरे पास ले आया
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी शबनम की तरह
एक तेरे दीदार को जानिब हम तरसते रहे
कोई अपना आज हमे, अपनों से जुदा कर आया
ये शाम आज और भी हो सकती थी हसीन
कोई सपना दिखा कर अपनों का , मेरी हँसी भी ले आया
बातों के दौर चलते रहे रंगीन बोतलों के साथ, हर एक शक्स मशगूल था वहां मेरे सिवा
मुझे नशा तेरी आँखों का था, मै आँखों से पी आया
एक ख्याल तेरा मुझे तेरे पास ले आया
उठ रहे थे तूफ़ान दिल में, न बाहर कोई शोर था
आँखों में मेरी चमक थी और चेहरे पे तेरा नूर था
इसी खींच तान में, समेट कर अपने को मै
चल पड़ा घर की तरफ, मै एक गुमनाम सा
गुज़रे चंद पल ही थे, लेकिन लगा मुझे क्यों जैसे
मै इन चंद साँसों में अपनी ज़िन्दगी जिआया
होता अक्सर यहीं है और बात भी सही है
नहीं होती हो तुम जब करीब, रहता है साथ तेरा साया
एक ख्याल तेरा मुझे तेरे पास ले आया
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी शबनम की तरह
"वैभव मैत्रेय"
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी शबनम की तरह
एक तेरे दीदार को जानिब हम तरसते रहे
कोई अपना आज हमे, अपनों से जुदा कर आया
ये शाम आज और भी हो सकती थी हसीन
कोई सपना दिखा कर अपनों का , मेरी हँसी भी ले आया
बातों के दौर चलते रहे रंगीन बोतलों के साथ, हर एक शक्स मशगूल था वहां मेरे सिवा
मुझे नशा तेरी आँखों का था, मै आँखों से पी आया
एक ख्याल तेरा मुझे तेरे पास ले आया
उठ रहे थे तूफ़ान दिल में, न बाहर कोई शोर था
आँखों में मेरी चमक थी और चेहरे पे तेरा नूर था
इसी खींच तान में, समेट कर अपने को मै
चल पड़ा घर की तरफ, मै एक गुमनाम सा
गुज़रे चंद पल ही थे, लेकिन लगा मुझे क्यों जैसे
मै इन चंद साँसों में अपनी ज़िन्दगी जिआया
होता अक्सर यहीं है और बात भी सही है
नहीं होती हो तुम जब करीब, रहता है साथ तेरा साया
एक ख्याल तेरा मुझे तेरे पास ले आया
रात भर पिघलती रही ज़िन्दगी शबनम की तरह
"वैभव मैत्रेय"
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