Friday, 6 April 2012

सीने में दर्द

सीने में ये दर्द क्यों, कभी कम नहीं होता
जब सोती है सारी दुनिया, ये बेचैन दिल क्यों नहीं सोता

क्यों रहती है शिकायत मुझे, अक्सर इस दिल से ए हमदम
आँखें सूख गयी कब की लेकिन ये दिल आज भी है क्यों रोता

मेरी हर फ़रियाद तेरे कानो तक जाके लौट आती है
मै चिल्लाता हूँ अकेले में, जब तेरी आवाज़ आती है
माना नहीं है मुमकिन नज़दीक मेरा तेरे आना
कर लिया आज हमने क्यों नसीब से ये भी समझोता

मै जहाँ भी, जैसे भी रहूँ, तू रहती हर पल साथ में मेरे
इस तन्हाई में बोलो, ये अँधेरे क्यों मुझे घेरे
बचते रहे है आज तक कालक से कोयले की
दामन से दाग फिर भी क्यों ये दिल नहीं धोता

मोहब्बत है इबादत उस खुदा की सुनते आये हैं हम साकी
पिला दे आज नज़रों से, न रहूँ होश में बाकी
संभालना कौन चाहे है कमबख्त आज तुम बोलो
न आज गुंजाईश शब्दों की, सिर्फ नज़रों से तुम बोलो
मै आया हूँ आज करने ज़िन्दगी से आखरी समझोता

सीने में ये दर्द क्यों, कभी कम नहीं होता
जब सोती है सारी दुनिया, ये बेचैन दिल क्यों नहीं सोता

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