उठा पटक - उठा पटक
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
गर दिल जो तेरा कभी जाये जो भटक
एक भांग की गोली...... ले तू भी सटक
अटपट, खटपट, होती हरवक्त
सोयें देर से हमेशा.............जागें झटपट
उठा पटक - उठा पटक
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
क्यों हो रहा हर ओर ये जो इतना शोर
हुए कागज़ के रिश्ते, थामें रेशमी डोर
हुई लम्बी कहानी ओर छोटे नाटक
घर ग़ुम हो गए, दिखें सिर्फ फाटक
उठा पटक - उठा पटक
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
वैभव मैत्रेय
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
गर दिल जो तेरा कभी जाये जो भटक
एक भांग की गोली...... ले तू भी सटक
अटपट, खटपट, होती हरवक्त
सोयें देर से हमेशा.............जागें झटपट
उठा पटक - उठा पटक
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
क्यों हो रहा हर ओर ये जो इतना शोर
हुए कागज़ के रिश्ते, थामें रेशमी डोर
हुई लम्बी कहानी ओर छोटे नाटक
घर ग़ुम हो गए, दिखें सिर्फ फाटक
उठा पटक - उठा पटक
कभी इसको पटक, कभी उसको पटक
वैभव मैत्रेय
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